अगर आप अपना नया बिज़नेस शुरू करने जा रहें हैं तो ना करें वास्तु को नजरअंदाज

भारत से लेकर विदेशों तक अपने ज्ञान और उसके पीछे छिपे साइंटिफिक एप्रोच से लोगों की ज़िन्दगी में एक सकारात्मक बदलाब लाने वाले वास्तु कंसलटेंट श्री मनोज जैन वास्तु रीडर के साथ होलिस्टिक कोच, ऑरा रीडर और लाइफ कोच भी हैं।
आज के समय में हर एक व्यक्ति कुछ वर्ष काम करने के बाद आपने बिज़नेस शुरू करना चाहता है, ना जाने कितने लोग रोज नया बिज़नेस शुरू करते है उनमें से कुछ अपने बिज़नेस को रोज नई बुलंदियों पर ले जाते हैं तो कुछ शुरू करने के कुछ महीने बाद ही बंद करने को मजबूर हो जाते हैं। अगर आप अपना कोई बिज़नेस कर रहें हैं या करने की सोच रहें हैं तो आपको वास्तु की कुछ बातों का पूरा ध्यान रखना चाहिए। वास्तुदोष के कारण बहुत से बिजनस असफल हो जाते हैं। इसलिए कारोबार में लाभ के लिए आपको वास्तु से संबंधित इन गलतियों से बचना चाहिए। तो आइये जानते हैं मनोज जैन से बिज़नेस को सफल बनाने के वास्तु टिप्स :

वास्तु विज्ञान के अनुसार, अगर आपके ऑफिस या दुकान में सीढ़ियां बनी हुई है तो इस बात का ध्यान रखें कि सीढ़ियों की संख्या विषम होनी चाहिए। व्यापार में बेहतर लाभ पाने के लिए सबसे पहले तो ध्यान रखें कि दुकान या ऑफिस की दीवारों का रंग गहरा ना हो। वह सफेद,या फिर दूसरे हल्के रंगों हो, दुकानों में उत्तर एवं पश्चिम दिशा की ओर शोकेस का निर्माण करवाना चाहिए । साथ ही कार्यालय का प्रवेश द्वार उत्तर या पूर्व की ओर रखें और सभी केबिनों के द्वार अंदर की ओर खुलने चाहिए । ध्यान रहे कि दुकान या ऑफिस में आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ हो तो बेहतर है। अगर यह संभव नहीं है तो आप पश्चिम की तरफ भी मुंह किया जा सकता है। लेकिन भूलकर भी अपनी कुर्सी इस तरह न रखें कि काम करते समय आपका मुंह दक्षिण की तरफ हो। दुकान में पैसे रखने की जगह इस तरह निर्धारित की जाए कि जब अलमीरा या रैक खुले तो उत्तर की तरफ उसका मुंह हो।
दुकान या शोरूम में सभी बिक्री का सामान हमेशा दक्षिण, पश्चिम या फिर वायव्य दिशा में होनी चाहिए। इस दिशा का मुख्य तत्व वायु है।
वास्तु के अनुसार, दुकान या कार्यक्षेत्र का बीच का भाग खुला होना चाहिए। बाकी जगहों की तुलना में इस दिशा में कम से कम सामान रखना चाहिए। यदि आपकी दुकान है तो कोशिश करें कि ग्राहक के निकलने का रास्ता साइड से न होकर बीच से हो।
अगर आपके केबिन या दुकान में छोटा-सा मंदिर बना है तो यह मंदिर आपकी कुर्सी के पीछे नहीं होना चाहिए। मतलब, जब आप बैठें तो आपकी पीठ मंदिर की तरफ नहीं होनी चाहिए। यह अशुभ है, हमेशा मंदिर को आंखों का सामने रखना चाहिए। इससे सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।